katha kunj

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आसमान में तारे गिनती सुकन्या ईश्वर से कह रही थी कि मेरे किस जन्म की सजा आपने मुझे दी कि मुझे शादी के 10 वर्ष बाद भी कोई औलाद नही दी,और बस 2 बूंद आंसू छलके जमीन पर गई पड़े , यही क्रम विवाह के एक वर्ष बाद से हर रात चल रहा था,डॉक्टरों का हर प्रयास निष्फल और दुआओं का निष्प्रभावी होना यही जीवन का अंग बन गया था, सुवह सुकन्या जल्दी उठी विवाह की वर्षगांठ थी तो सोंचा इस वर्ष अनाथालय में बच्चो के साथ...More

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